देववाणी संस्कृत को उसका प्राचीन वैभव दिलाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री का सराहनीय पहल
1 min readअंबेडकरनगर
देववाणी संस्कृत को उसका प्राचीन वैभव दिलाने के लिए माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी का सराहनीय पहल
सरकार ने संस्कृत विद्यालयों/महाविद्यालयों की सुध ली पिछले 24 वर्षों से उपेक्षा का शिकार हो रहे संस्कृति विद्यालय और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को उत्तम शिक्षा देने के लिए कटिबंध
रामधारी रवि शंकर संस्कृत माध्यमिक विद्यालय शाहपुर बनगवां रामनगर अंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश का पहला इंटर कॉलेज है” जो संस्कृत बोर्ड लखनऊ से एक साथ आर्ट साइड विज्ञान और कॉमर्स की मान्यता प्राप्त हुई बीते दिनांक 23/12/2024 को

वहीं यदि बात करें तो प्रबंधक रविशंकर त्रिपाठी जी के द्वारा अपने विद्यालय के प्रति उत्कृष्ट कार्यों के अथक प्रयास अनवरत किये जा रहे थे
पहले, राज्य में केवल दो सरकारी संस्कृत माध्यम स्कूल थे। लेकिन योगी सरकार ने 15 नये आवासीय संस्कृत माध्यम विद्यालय स्थापित किये।
इसी तरह वर्ष 25/26 में संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने नये संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों को मान्यता देन देने के लिए बनाई बड़ी रणनीति और कहा हम और हमारी सरकार संस्कृत के प्रति कटिबंध
वहीं यदि बात करें तो संस्कृत की शिक्षा ग्रहण करने वाले ज्यादातर छात्र और छात्राएं निर्धन परिवारों की पृष्ठभूमि से होते हैं।
वही विशेष सूत्रों की माने तो अब इसमें किसी प्रकार का कोई भी छात्र-छात्राएं चाहे किसी भी आय वर्ग का हो, अगर वो संस्कृत का विद्यार्थी बनेगा तो उसे छात्रवृत्ति का लाभ मिलेगा।
सूबे की योगी सरकार के कार्यकाल में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के साथ संस्कृत को जन-जन तक पहुंचाने और बोलचाल की भाषा के रूप में विकसित करने के बड़े प्रयास किये हैं।
विश्व की सबसे प्राचीन भाषा और समस्त भारतीय भाषाओं की जननी कही जाने वाली ‘संस्कृत’ को योगी सरकार में सम्मान मिला है।
इससे पहले पूर्व की सरकारों ने कभी भी संस्कृत को आगे बढ़ाने के प्रयास नहीं किये।
संस्कृत के नाम पर अकादमी और संस्थान तो चले लेकिन उनको आगे बढ़ाने के लिए कभी भी ठोस और प्रभावी योजनाएं नहीं बनी।
जिसकी वजह से संस्कृत लोकप्रिय भाषा के रूप में स्थापित नहीं हो पाई।
योगीराज में हुआ उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का पुनर्गठन करीब 16 साल बाद वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ जी के निर्देश पर उप्र माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद का पुनर्गठन किया गया।
निदेशक माध्यमिक शिक्षा को परिषद का अध्यक्ष बनाया गया है। इसमें अध्यक्ष समेत 28 सदस्य होंगे। संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2000 में पहले यूपी संस्कृत बोर्ड का गठन किया गया था लेकिन केवल कहने के लिए बोर्ड के नाम पर संचालित हो रहा था।
आलम यह था कि परिषद से सम्बद्ध संस्कृत विद्यालयों का कहीं कोई ऑनलाइन रिकॉर्ड तक मौजूद नहीं था।
यहीं नहीं परिषद के कई एडेड स्कूल ऐसे हैं, जिनके पास अपने भवन और शिक्षक तक नहीं थे।
पिछले सात वर्षों में योगी सरकार ने ना केवल बोर्ड का पुनर्गठन किया बल्कि सभी संस्कृत विद्यालयों को ऑनलाइन किया और एकरूपता स्थापित की।
योगी सरकार में संस्कृत की पढ़ाई को मिला प्रोत्साहन
योगी सरकार ने संस्कृत के प्रचार-प्रसार को प्राथमिकता में रखा।
ब्यूरो रिपोर्ट
