बेटे के साथ हुई मारपीट की एफआईआर लिखवाने थाने पर गए सामाजिक कार्यकर्ता का नहीं लिखा एफआईआर तो बरिष्ठ अधिकारी से हुई शिकायत
1 min readसमाजसेवी की रिपोर्ट लिखने के बजाय दिन भर टरकाती रही पुलिस
चुनाव आयोग व जिले के एसपी से हुई शिकायत।
मामले को लेकर कई सामाजिक संगठनों में आक्रोश।
गोण्डा

जनपद में बेटे के साथ हुई मारपीट की रिपोर्ट लिखवाने थाने पर गए एक सामाजिक कार्यकर्ता, आरटीआई एक्टिविस्ट को पुलिस दिन भर टरकाती रही। इसको लेकर कई सामाजिक संगठनों में जबरदस्त आक्रोश है। मामले की शिकायत चुनाव आयोग और जिले के पुलिस अधीक्षक से की गई है।
परसपुर क्षेत्र के ग्राम मलांव के पूरे हठ्ठी सिंह निवासी सामाजिक कार्यकर्ता आरटीआई एक्टिविस्ट देवनारायण सिंह ने बताया कि उनका पुत्र अक्षय प्रताप सिंह सत्ताइस मार्च बुधवार को आवश्यक कार्य से घर से परसपुर बाजार जा रहा था। तभी रंजिशन तीन लोगों ने घर से तकरीबन एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित नहर पुलिया के पास रास्ते में उसके बेटे को लाठी डंडों से पीटा गया। जिससे उसे काफी चोटें आईं हैं। इसके पूर्व होली के दिन भी बेटे के साथ मारपीट की है। मामले की लिखित तहरीर परसपुर थाने पर दी गई लेकिन इंस्पेक्टर प्रदीप शुक्ला ने उन्हें कल आने की बात कहते हुए टरका दिया। डीएन सिंह का कहना है कि इंस्पेक्टर ने रिपोर्ट लिखने के बजाय दिन भर उनको थाने में टहलाते रहे। बता दें कि एक तरफ सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार यह मंंशा जताते हुए पुलिस विभाग के आला अधिकारियों/थाना व चौकी प्रभारियों को फरमान जारी कर रही है कि थाने,चौकी पर आए पीड़ितों की व्यथा पुलिस सुने और उसे न्याय मिले। लेकिन परसपुर पुलिस पीड़ितों के साथ कम दबंगों के साथ ज्यादा खड़ी दिखाई देती है। यहां पुलिस कानून को अपने घर का खेती समझ रही है। जिससे पीड़ितों की दुश्वारियां बढ़ गई है। क्षेत्र के नीरज सिंह (पत्रकार ) सहित कई संगठनों व प्रबुद्ध जनों ने इंस्पेक्टर के इस कृत्य की निंदा करते हुए जिले के कप्तान विनीत जायसवाल से मामले में त्वरित कार्रवाई कराए जाने की मांग की है।
