कुंवर शारदेन मोहन के समर्थकों पर एक घंटे में ताबड़तोड़ 2 एफआईआर, सियासत गरमाई
1 min readकुंवर शारदेन मोहन के समर्थकों पर एक घंटे में ताबड़तोड़ 2 एफआईआर, सियासत गरमाई – साजिश या संयोग?
सरयू रेलवे क्रॉसिंग पर मारपीट-फायरिंग और रामलीला मैदान में हंगामे के आरोप, दोनों मुकदमे 21 अक्टूबर को दर्ज, पुलिस की टाइमिंग पर उठे सवाल
कर्नलगंज, गोंडा।
कर्नलगंज विधानसभा क्षेत्र के दिवंगत पूर्व विधायक कुंवर अजय प्रताप सिंह उर्फ लल्ला भैया के सुपुत्र कुंवर शारदेन मोहन सिंह के समर्थकों पर एक ही दिन में दो एफआईआर दर्ज होने से कर्नलगंज की सियासत गरमा गई है। पुलिस अभिलेखों के मुताबिक, 21 अक्टूबर को करीब एक घंटे के भीतर उनके नाम से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में मुकदमे दर्ज किए गए। एक मामला जनसत्ता दल से जुड़े लोगों के साथ कथित मारपीट और फायरिंग का है, जबकि दूसरा दशहरे की रामलीला के दौरान मंच पर चढ़ने को लेकर धक्का मुक्की व पुलिस से अभद्रता और सरकारी काम में बाधा पहुंचाकर हंगामा करने के आरोप से जुड़ा है। फटाफट दर्ज हुई दोनों एफआईआर ने 3 बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अब आम जनता में यही चर्चा है कि क्या यह कानून का एक्शन है या सियासी साजिश का हिस्सा?

पहला मामला सरयू रेलवे क्रॉसिंग से जुड़ा है। वादी दीपू सिंह ने आरोप लगाया है कि 16 अक्टूबर 2026 की रात 9:15 बजे सरयू रेलवे क्रॉसिंग फाटक बंद होने के दौरान 18-20 गाड़ियों के काफिले में सवार लोगों ने उन्हें गाड़ी से खींचकर लाठी-डंडे से पीटा, गले पर लात रखी, साथी जीशन की कनपटी पर पिस्टल लगाई, हवाई फायरिंग की और जनसत्ता दल प्रमुख राजा भैया को गाली दी। दूसरा मामला रामलीला मैदान, दशहरा मेला का है। 20 अक्टूबर को दशहरे मेले के दौरान रामलीला मंच पर चढ़ने को लेकर धक्का-मुक्की और हंगामे का आरोप है। दोनों ही मामलों में कुंवर शारदेन मोहन सिंह के समर्थकों पर एफआईआर दर्ज हुई है।
पुलिस की कार्रवाई पर 3 बड़े सवाल
16 अक्टूबर की घटना की एफआईआर 21 को क्यों? पीड़ित का दावा है कि मौके पर डायल 112 बुलाई गई थी और 17 अक्टूबर को शिकायती पत्र भी दिया गया था। ऐसे में 5 दिन तक पुलिस ने क्या किया? एफआईआर सीधे 21 अक्टूबर को क्यों दर्ज हुई? क्या किसी के इशारे का इंतजार हो रहा था? दशहरा मेले में पुलिस मौके पर थी,फिर देरी क्यों? 20 अक्टूबर शाम को रामलीला मैदान में हंगामा हुआ, पुलिस खुद मेले में ड्यूटी पर मौजूद थी। फिर उसी समय कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अगले दिन एफआईआर के लिए इंतजार क्यों किया गया?
एक घंटे में दो-दो एफआईआर- संयोग या साजिश?
सबसे चौंकाने वाला पहलू – दोनों अलग-अलग घटनाओं की एफआईआर 21 अक्टूबर को एक घंटे के भीतर ताबड़तोड़ दर्ज कर दी गईं। इस टाइमिंग ने शक को जन्म दे दिया है। सच्चाई जो भी हो, नवरात्रि और दशहरे जैसे पर्वों के दौरान दर्ज हुई ये एफआईआर आमजन में व्यापक चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
पुलिस ने दोनों मामलों में बीएनएस की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पूरी सच्चाई पुलिस की विवेचना के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी, लेकिन एफआईआर की देरी और एक साथ हुई कार्रवाई ने पूरे मामले को अब सियासी मोड़ पर ला दिया है।
मामले में वास्तविक स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। अब सबकी नजर पुलिस की आगे की कार्रवाई पर है।
