किसानों के बच्चों के लिए छात्रवृत्ति की सीटें दोगुनी, अब सालाना मिलेंगे 60 हजार रुपये
1 min readलखनऊ।
उत्तर प्रदेश में किसानों और खेतिहर मजदूरों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा दिलाने के लिए मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना का दायरा बढ़ा दिया गया है। प्रदेश सरकार ने योजना के तहत छात्रवृत्ति की निर्धारित सीटें दोगुनी कर दी हैं। अब अधिक विद्यार्थियों को सालाना 60 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद की इस योजना के तहत कृषि विश्वविद्यालयों एवं कृषि संस्थानों में छात्रवृत्ति की सीटें 45 से बढ़ाकर 90 और कृषि महाविद्यालयों में 15 से बढ़ाकर 30 कर दी गई हैं। इस तरह कुल निर्धारित सीटें 1,410 से बढ़कर 2,820 हो गई हैं।
36 हजार की जगह अब मिलेंगे 60 हजार रुपये
योजना के तहत छात्रवृत्ति की मासिक राशि तीन हजार से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी गई है। इसके परिणामस्वरूप चयनित विद्यार्थियों को अब सालाना 36 हजार रुपये के बजाय 60 हजार रुपये मिलेंगे। यानी प्रत्येक विद्यार्थी को सालाना 24 हजार रुपये अतिरिक्त सहायता मिलेगी।
अब तक 6,454 विद्यार्थियों को मिला लाभ
मंडी परिषद के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2017-18 से 2025-26 तक योजना के तहत 6,454 विद्यार्थियों को करीब 22.90 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है। सीटों में बढ़ोतरी से कृषि, उद्यान, वानिकी, पशुपालन और संबंधित विषयों की पढ़ाई कर रहे पात्र विद्यार्थियों को लाभ मिलने का दायरा बढ़ेगा।
मेरिट के आधार पर होगा चयन
योजना का लाभ उत्तर प्रदेश के निवासी किसानों और खेतिहर मजदूरों के पुत्र-पुत्रियों तथा उन पर पूर्ण रूप से आश्रित पात्र विद्यार्थियों को दिया जाता है। स्नातक स्तर पर यूपी बोर्ड से इंटरमीडिएट में न्यूनतम 70 प्रतिशत और अन्य बोर्ड से 85 प्रतिशत अंक निर्धारित हैं। वहीं, स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम के लिए स्नातक में कम से कम 70 प्रतिशत अंक जरूरी हैं। चयन निर्धारित पात्रता और मेरिट के आधार पर किया जाएगा।
मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, छात्रवृत्ति की सीटों और धनराशि में वृद्धि से आर्थिक रूप से कमजोर किसान परिवारों के मेधावी बच्चों को उच्च कृषि शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इससे कृषि क्षेत्र में विशेषज्ञों और कृषि आधारित उद्यमियों की नई पीढ़ी तैयार करने के अवसर भी बढ़ेंगे।

