बीकापुर पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, एसएसपी से शिकायत के बाद नहीं हुई सुनवाई, न्यायालय पहुंची पीड़िता दर्ज हुआ FIR
1 min readघायल बेटे-बहू को जेल भेजने का आरोप, 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला न्याय के लिए लगा रही चक्कर
बीकापुर पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, एसएसपी से शिकायत के बाद न्यायालय पहुंची पीड़िता दर्ज हुआ FIR
खुलेआम घूम रहे आरोपी एक पक्षीय कार्यवाही से असंतुष्ट है 65 वर्षीय बुजुर्ग पीड़ित महिला रो-रो कर बताया आपबीती
बीकापुर, अयोध्या।
कोतवाली बीकापुर पुलिस की कार्यशैली को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। एक 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला ने पुलिस पर घायल बेटे और बहू की शिकायत दर्ज न करने तथा दूसरे पक्ष की तहरीर पर बेटे बहू को गिरफ्तार कर जेल भेजने का आरोप लगाया है। पीड़िता का कहना है कि न्याय के लिए थाने से लेकर एसएसपी कार्यालय तक गुहार लगाने के बावजूद उसकी सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी।
घर में घुसकर हमला करने का आरोप
मामला कोतवाली बीकापुर क्षेत्र की ग्राम पंचायत जोहन स्थित पूरे चितई मिश्र के पुरवा का है। पीड़िता रानी देवी के अनुसार, बीते 7 अगस्त 2026 को पट्टीदारों ने कथित तौर पर उनके घर में घुसकर उनकी बहू निशा और बेटे राजेश मिश्रा पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया। आरोप है कि हमले में राजेश के सिर में गंभीर चोट आई और वह बेहोश हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को एंबुलेंस से जिला अस्पताल भिजवाया। हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि उसकी शिकायत पर प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।
अस्पताल में भर्ती बेटे को गिरफ्तार करने का आरोप पीड़िता रानी देवी ने लगाया है कि दूसरे पक्ष की महिला नेहा की तहरीर पर पुलिस ने अपराध संख्या 312/2026 के तहत मुकदमा दर्ज किया, जिसमें उनके घायल बेटे राजेश और बहू निशा को भी आरोपी बना दिया गया। पीड़िता के मुताबिक, 8 अगस्त की रात करीब आठ बजे पुलिस ने जिला अस्पताल में इलाज करा रहे राजेश को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। बाद में उसकी पत्नी निशा को भी जेल भेज दिया गया।
पीड़िता का कहना है कि बेटे और बहू के जेल जाने के बाद परिवार के तीन नाबालिग बच्चों की देखभाल की जिम्मेदारी 65 वर्षीय बुजुर्ग महिला के ऊपर है। उम्र के इस पड़ाव पर उन्हें बच्चों की परवरिश के साथ न्याय पाने के लिए भी लगातार प्रयास करने पड़ रहे हैं।
एसएसपी से शिकायत के बाद नहीं हुई कोई कार्रवाई तो न्यायालय पहुंची पीड़ित बुजुर्ग महिला
के अनुसार, उसने 19 अगस्त 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को शिकायती पत्र दिया और 21 अगस्त को रजिस्ट्री के माध्यम से भी अपनी शिकायत भेजी। उसने अपने प्रार्थना पत्र के साथ चिकित्सकीय रिपोर्ट और घायल की तस्वीरें संलग्न करने का भी दावा किया है। इसके बावजूद प्राथमिकी दर्ज नहीं होने पर उसने 10 सितंबर 2026 को अयोध्या के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया।
पीड़िता ने न्यायालय से बीकापुर पुलिस को प्राथमिकी दर्ज कर मामले की निष्पक्ष विवेचना करने का निर्देश देने की मांग की है।
पुलिस की निष्पक्षता पर उठे सवाल
इस मामले में पीड़िता ने सवाल उठाया है कि जब उसका बेटा और बहू घायल थे, तो उनकी शिकायत पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की गई? एसएसपी को शिकायत देने के बाद भी कथित तौर पर सुनवाई क्यों नहीं हुई?
थाना प्रभारी बीकापुर देवेंद्र पांडेय व विवेचक बुद्बीमान सिंह चौरेबाजार चौकी प्रभारी पर भी उठ रहे गंभीर सवाल
फिलहाल, पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस का पक्ष सामने आना बाकी है। मामले में न्यायालय की ओर से कोई आदेश पारित हुआ है या नहीं, इसकी भी पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और न्यायालय की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
जहां पर अब देखने की बात यह है कि पुलिस प्रशासन के द्वारा दूसरे पक्ष पर कार्रवाई करती है या फिर यह मामला ठंडे बस्ते में डालकर लीपापोती करती है
वहीं पर खबर लिखने वाले पत्रकारों पर भी पुलिस प्रशासन के द्वारा लगातार फोन कर दबाव बनाने का प्रयास व धमकी ।
नोट: यह समाचार पीड़िता की ओर से लगाए गए आरोपों पर आधारित है।

