आज गोंडा आएंगे चंद्रशेखर आजाद, विनोद साहनी के परिजनों से मिलेंगे; बोले- कार्यकर्ताओं पर हमला बर्दाश्त नहीं
1 min read17 सितंबर को फिर गोंडा आएंगे चंद्रशेखर आजाद: विनोद साहनी के परिजनों से मिलेंगे; बोले- कार्यकर्ताओं पर हमला बर्दाश्त नहीं
गोण्डा।

जिले में विनोद साहनी हत्याकांड के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। भीम आर्मी चीफ और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद चंद्रशेखर आजाद ने 17 सितंबर को गोंडा आने की बात कही है। उन्होंने मंगलवार दोपहर में एक वीडियो जारी कर यह जानकारी दी। इससे पहले 12 सितंबर को चंद्रशेखर आजाद विनोद साहनी के परिजनों से मिलने गोंडा आ रहे थे। तब गोंडा पुलिस ने उन्हें बाराबंकी में ही रोक लिया था। बाराबंकी में विरोध प्रदर्शन के बाद वे लखनऊ चले गए थे। चंद्रशेखर आजाद के फिर से गोंडा आने की बात कहने के बाद जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है। भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के नेताओं की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि अगर 17 सितंबर तक विनोद सहनी हत्याकांड में कार्रवाई नहीं हुई, तो वे फिर गोंडा लौटेंगे। उन्होंने कहा कि वे बाराबंकी के जरिए कार्रवाई की रिपोर्ट भी लेंगे और विनोद सहनी के परिजनों से मुलाकात करेंगे। 12 सितंबर को चंद्रशेखर आजाद को पुलिस ने बाराबंकी में रोक दिया था।
आजाद ने कहा,”अगर हमारी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो हम विनोद भाई के परिवार की मांग पर आएंगे। बाराबंकी में हमारे साथ जो हुआ, उन मांगों पर कार्रवाई न होने पर भी मैं 17 तारीख को आऊंगा।” उन्होंने विनोद साहनी हत्याकांड पर कहा कि पुलिस चाहे तो एक पत्ता भी न हिले,लेकिन बिना पुलिस की सहमति के ऐसा नहीं हो सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर पुलिस की सहमति नहीं है, तो यह इंटेलिजेंस की नाकामी है। विनोद की हत्या इसका बड़ा उदाहरण है। आजाद ने कहा कि अगर पुलिस पहले से कुछ लोगों को रोकती,तो शायद यह स्थिति नहीं बनती। चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उन पुलिस अधिकारियों की जांच होनी चाहिए। उनके नंबर, कॉल डिटेल और उनके फोन पर किसका फोन आ रहा था इसकी जांच हो और यह सब किसके इशारे पर हुआ इसका पता लगाया जाए। उन्होंने आगे कहा,”मेरा कार्यकर्ता मेरा परिवार है। किसी भी कार्यकर्ता पर हमला बर्दाश्त नहीं करूंगा।” उन्होंने बताया कि विनोद साहनी उनसे दो महीने पहले मिले थे और करनैलगंज विधानसभा से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। आजाद ने उन्हें मदद का भरोसा दिया था।
