डायरेक्ट सेलिंग में आयुर्वेदिक दवा बिक्री को लेकर बड़ा सवाल, बिना डिग्री के लोगों को बेंच रहे आयुर्वेद दवा
1 min readलखनऊ।

डायरेक्ट सेलिंग के जरिए कंपनियां अपने नेटवर्कर के माध्यम से सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू उपयोग की वस्तुएं और पोषण संबंधी प्रोडक्ट बेचती आई हैं। लेकिन आयुर्वेदिक दवाओं की बिक्री को लेकर नियम साफ हैं।
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) और आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी नेटवर्कर या डिस्ट्रीब्यूटर को दवा बेचने या चिकित्सा परामर्श देने की अनुमति नहीं है। डायरेक्ट सेलिंग गाइडलाइंस, 2021 के तहत केवल वही उत्पाद बेचे जा सकते हैं, जिनकी मार्केटिंग के लिए अलग से चिकित्सकीय परामर्श की आवश्यकता न हो।
आयुर्वेदिक दवाइयां ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 तथा ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के दायरे में आती हैं। इसका अर्थ है कि ऐसी दवाएं केवल मान्यता प्राप्त आयुर्वेद चिकित्सक की पर्ची पर ही मरीज को दी जा सकती हैं। डायरेक्ट सेलिंग एजेंट/नेटवर्कर यदि इन्हें बेचते हैं या बीमारियों के इलाज का दावा करते हैं, तो यह नियमों का उल्लंघन होगा और दंडनीय अपराध माना जाएगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि नेटवर्कर को केवल सामान्य हर्बल या न्यूट्रास्यूट्रिकल प्रोडक्ट बेचने की अनुमति है। लेकिन दवा बताकर या रोगों के शत-प्रतिशत इलाज का दावा कर उपभोक्ता को गुमराह करना गैरकानूनी है। जैसे की उत्तर प्रदेश, व मध्य प्रदेश व की राज्यों में अपना पांव पसार रहे नेटवर्कर आयुर्वेद दवा की डायरेक्ट कर रहे सेलिंग जैसे की उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में तेजी से फ़ैल रहा डायरेक्ट सेलिंग के जरिए कंपनियां अपने नेटवर्कर के माध्यम से सौंदर्य प्रसाधन, घरेलू उपयोग की वस्तुएं व आयुर्वेद दवा व अन्य सामग्री क्या सरकार इस पर उठायेगी बड़ा कदम
जन जागरूकता के तौर पर उपभोक्ताओं को यह समझना जरूरी है कि नेटवर्कर न तो आयुर्वेद चिकित्सक हैं और न ही दवा बेचने के लिए अधिकृत। अगर कोई नेटवर्कर खुद को आयुर्वेद सलाहकार बताकर दवा बेचता है तो उपभोक्ता सीधे जिला प्रशासन, औषधि निरीक्षक या उपभोक्ता फोरम में शिकायत कर सकता है।
सवाल साफ है – डायरेक्ट सेलिंग कंपनियां दवा नहीं बेच सकतीं, केवल सामान्य हेल्थ सप्लीमेंट्स और उत्पादों की बिक्री की अनुमति है।
