वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी के मुद्दे पर बीसीआई हटी पीछे, निष्कासन को लिया वापस
1 min readबार काउंसिल ऑफ इंडिया ने दिल्ली हाईकोर्ट में दिया हलफनामा
वरिष्ठ अधिवक्ता श्रीनाथ त्रिपाठी के मुद्दे पर बीसीआई हटी पीछे, निष्कासन को लिया वापस
8 सितंबर को जवाब दाखिल करने के लिए कोर्ट ने की थी तिथि नियत
वाराणसी।
विगत दिनों बार काउंसिल ऑफ इंडिया के को-चेयरमैन श्रीनाथ त्रिपाठी के निष्कासन को लेकर चल रही उठा पटक समाप्त हो गई है। बीसीआई अपने ही फैसले से पीछे हट गई है और श्रीनाथ त्रिपाठी के निष्कासन के निर्णय को वापस ले लिया है। बीसीआई के प्रमुख सचिव श्रीमांतो सेन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर श्रीनाथ त्रिपाठी के निष्कासन को निरस्त करने की जानकारी देते हुए समस्त कार्यवाही को समाप्त करने की अपील की है। दिल्ली हाईकोर्ट में दिए गए हलफनामा में प्रमुख सचिव ने कहा है कि तथ्यों और लागू नियमों पर सावधानीपूर्वक पुनर्विचार करने के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपने 16 अगस्त 2025 की बैठक के माध्यम से परिसंचरण द्वारा 28 अप्रैल 2025 के पारित प्रस्ताव को वापस ले लिया है, जिसके द्वारा याचिकाकर्ता श्रीनाथ त्रिपाठी को बार काउंसिल ऑफ इंडिया की सदस्यता से हटा दिया गया था। यह वापसी बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के प्रति पूर्वाग्रह के बिना है।
इसके बाद इस मामले में श्रीनाथ त्रिपाठी से बात करने पर उन्होंने कहा कि न्याय की जीत हुई है। उन्हें जिस प्रकार से गलत ढंग से हटाया गया था, वह पूर्णतया गलत था। उन्हें न्यायिक प्रक्रिया और सरकार पर सवाल खड़ा करने को लेकर मनमाने ढंग से हटा दिया गया था। जिसके बाद उन्होंने अपने अधिवक्ता कपिल सिब्बल के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए उनकी सदस्यता को निष्कासित करने के बार काउंसिल ऑफ इंडिया के फैसले पर रोक लगाते हुए उनकी सदस्यता बहाल कर बार काउंसिल ऑफ इंडिया से 8 सितंबर को अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया था। हालांकि उसके पहले ही बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अपना जवाब जवाब कोर्ट में दाखिल कर दिया।
श्रीनाथ त्रिपाठी ने कहा कि उनकी इस लड़ाई में वाराणसी समेत अन्य जनपदों के अधिवक्ताओं ने जिस प्रकार अपना समर्थन और स्नेह दिया, उसके लिए भी सभी का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। हमेशा अधिवक्ता हित के लिए समर्पित रहा हूं और आगे भी रहूंगा। मेरा प्रमुख उद्देश्य एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट को प्रदेश में लागू कराना है। जिसके लिए मैं लगातार प्रयासरत हूं।

