चकबंदी में मनमानी का आरोप, प्रधान के इशारे पर कानूनगो-लेखपाल दे रहे धमकी? जगदीश विश्वकर्मा ने उठाए गंभीर सवाल
1 min readचकबंदी में मनमानी का आरोप! प्रधान के इशारे पर कानूनगो-लेखपाल दे रहे धमकी? जगदीश विश्वकर्मा ने उठाए गंभीर सवाल
धारा 52 के प्रकाशन के बाद भी जमीन विवाद बरकरार, गलत पैमाइश कर चक में जमीन निकालने का आरोप; डीएम से निष्पक्ष जांच की मांग
पूरा मामला धम्मौर थानाक्षेत्र के सरैया गांव का है
सुलतानपुर।
जमीन की पैमाइश और चकबंदी को लेकर एक बार फिर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए हैं। धम्मौर थानाक्षेत्र के सरैया गांव निवासी शिकायतकर्ता जगदीश विश्वकर्मा ने ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद यादव, कानूनगो योगेंद्र श्रीवास्तव और लेखपाल आशीष मिश्रा की भूमिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जमीन की पैमाइश में कथित गड़बड़ी की जा रही है और विरोध करने पर उन्हें धमकी दी जा रही है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
प्रधान, कानूनगो और लेखपाल की भूमिका पर सवाल
जगदीश विश्वकर्मा का आरोप है कि ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद यादव के इशारे पर कानूनगो योगेंद्र श्रीवास्तव और लेखपाल आशीष मिश्रा उन्हें परेशान कर रहे हैं। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने हकबरारी के लिए प्रशासन को आवेदन दिया है और अपनी जमीन के अभिलेख दुरुस्त कराने की मांग की है। इसके बावजूद कथित तौर पर गलत पैमाइश करके उनकी चक में जमीन निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
जगदीश विश्वकर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित राजस्वकर्मियों पर उन्हें भरोसा नहीं है और उनके साथ धमकी भरा व्यवहार किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि वे इस तरह दबाव में नहीं आते हैं, तो प्रशासन का सहारा लेने की बात कही जा रही है।
निष्पक्ष पैमाइश हो, तभी सामने आएगी सच्चाई
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन की सीमाओं और रकबे को लेकर विवाद है, तो निष्पक्ष पैमाइश कराकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती? धारा 52 के प्रकाशन के बाद भी विवाद बना हुआ है, तो संबंधित अभिलेखों और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान जरूरी है।
जिलाधिकारी सुलतानपुर से मांग है कि मामले का संज्ञान लेकर किसी निष्पक्ष सक्षम अधिकारी से पैमाइश कराई जाए। साथ ही, ग्राम प्रधान राजेंद्र प्रसाद यादव, कानूनगो योगेंद्र श्रीवास्तव और लेखपाल आशीष मिश्रा की भूमिका की जांच कराई जाए। यदि धमकी देने, गलत पैमाइश करने या पद का दुरुपयोग करने के आरोप प्रमाणित होते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
सवाल साफ है—क्या जगदीश विश्वकर्मा को निष्पक्ष जांच और अपनी जमीन के संबंध में न्याय मिलेगा, या उन्हें न्याय के लिए अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ेंगे? अब संबंधित प्रशासन की कार्रवाई पर सबकी नजर है।

