आस्था के मंच से सामाजिक एकजुटता का संदेश, इसौली में धार्मिक आयोजनों के बीच सक्रिय दिखीं भाजपा प्रदेश मंत्री बबिता तिवारी
1 min readआस्था के मंच से सामाजिक एकजुटता का संदेश, इसौली में धार्मिक आयोजनों के बीच सक्रिय दिखीं भाजपा प्रदेश मंत्री बबिता तिवारी
पूजा पंडालों में किया विधि-विधान से पूजन-अर्चन, कुड़वार की रामलीला में प्रभु श्रीराम की आरती उतारकर लिया आशीर्वाद
धर्म, संस्कृति और सामाजिक समरसता को बताया समाज की मजबूती का आधार
सुल्तानपुर। इसौली विधानसभा क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों के बीच भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश मंत्री बबिता तिवारी की सक्रियता देखने को मिली। विभिन्न स्थानों पर स्थापित दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर उन्होंने मां भगवती के चरणों में शीश नवाया और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की। वहीं, कुड़वार में आयोजित रामलीला में शामिल होकर प्रभु श्रीराम की आरती उतारी और उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने का संदेश दिया। बबिता तिवारी की इन धार्मिक गतिविधियों को केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ाव और सामाजिक संवाद के एक अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है। धार्मिक आयोजनों में जनभागीदारी भारतीय समाज की उस परंपरा को रेखांकित करती है, जहां आस्था के साथ सामाजिक मेल-मिलाप और सामूहिक सहभागिता को भी विशेष महत्व दिया जाता है।
राम के आदर्शों में समाज और सुशासन का संदेश
कुड़वार की रामलीला में सहभागिता के दौरान बबिता अखिलेश तिवारी ने आयोजन मंडल को भव्य कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन सत्य, मर्यादा, त्याग, कर्तव्य और जनकल्याण की प्रेरणा देता है। रामलीला जैसे आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और नैतिक मूल्यों से जोड़ने के साथ ही समाज में आपसी सद्भाव को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने धार्मिक एवं सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों की सार्थकता तभी है, जब इनके माध्यम से समाज में प्रेम, सहयोग और पारस्परिक सम्मान की भावना मजबूत हो।
आस्था के साथ सामाजिक समरसता पर जोर
इसौली विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न पूजा पंडालों में उनकी उपस्थिति ने धार्मिक आयोजनों के प्रति सहभागिता का संदेश दिया। भारतीय समाज की विविधता के बीच सांस्कृतिक परंपराएं लोगों को जोड़ने का काम करती हैं। ऐसे में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों की भागीदारी सामाजिक संवाद को आगे बढ़ाने और स्थानीय परंपराओं के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। कुल मिलाकर, इसौली क्षेत्र में पूजा पंडालों से लेकर कुड़वार की रामलीला तक बबिता तिवारी की सहभागिता ने धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता के मुद्दों को केंद्र में रखा।

