झोलाछाप की क्लीनिक सील, पर सीएमओ की नींद तब खुली जब बच्ची मौत के मुंह में पहुंची
1 min readखबर का असर: झोलाछाप की क्लीनिक सील, पर सीएमओ की नींद तब खुली जब बच्ची मौत के मुंह में पहुंची
29 जुलाई से शिकायत, 1 हफ्ते तक सोता रहा महकमा। फोन किया तो सीएमओ ने काटा, पुलिस ने एफआईआर तक दर्ज नहीं की
करनैलगंज (गोण्डा)। स्थानीय क्षेत्र में झोलाछाप के इंजेक्शन से 3 साल की बच्ची की हालत बिगड़ने मामले की समाचार पत्र में खबर छपते ही स्वास्थ्य विभाग और पुलिस की कुंभकर्णी नींद टूटी। छतौनी चौराहे पर संचालित कथित झोलाछाप अरविन्द कुमार वर्मा की क्लीनिक को शुक्रवार शाम सीएमओ के आदेश पर सील कर दिया गया। लेकिन ये कार्रवाई देर से हुई और अधूरी है। सवाल ये है कि 3 साल की रहनुमा की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले के खिलाफ एफआईआर कब होगी?
1 हफ्ते तक फाइलें दबाकर सोते रहे अधिकारी
भुलियापुर निवासी ननकू की बेटी को 29 जुलाई को बुखार के इलाज में गलत इंजेक्शन लगा। बच्ची के शरीर पर छाले पड़ गए, 2 बार खून चढ़ा, हालत अब भी गंभीर है।
पीड़ित परिवार 29 जुलाई से सीएमओ, एसपी, कोतवाली, सीओ, भंभुआ चौकी और सीएम पोर्टल के चक्कर काट रहा था। पर न स्वास्थ्य विभाग जागा, न पुलिस। उल्टा आरोपी ने गाली देकर धमकाया।
खबर प्रकाशित होते ही शुक्रवार शाम आनन-फानन में टीम भेजकर क्लीनिक पर ताला लगा दिया गया।
जवाबदेही से भागते नजर आए जिम्मेदार
जब इस मामले में एफआईआर की स्थिति जानने के लिए सीएमओ डॉ. संतलाल पटेल से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन काट दिया।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. अनुज कुमार ने जांच टीम गठित करने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
वहीं कोतवाली करनैलगंज पुलिस ने 1 हफ्ते बाद भी मुकदमा दर्ज करना जरूरी नहीं समझा।
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि यदि अधिकारी समय पर हरकत में आते तो मासूम की हालत इतनी नहीं बिगड़ती। अवैध क्लीनिक सालों से चल रहा था, पर किसी ने जांच नहीं की।
अब जनता मांग कर रही है – क्लीनिक सील से काम नहीं चलेगा। झोलाछाप पर तुरंत मुकदमा दर्ज हो और जिले के सभी फर्जी डॉक्टरों पर सघन अभियान चलाकर छापेमारी और सख्त कार्रवाई हो।


